रामायण: पार्ट 1 फिल्म अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म का विषय भगवान राम की कहानी है, जो करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी है। मेकर्स ने इसे भव्य रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन शुरुआती रिव्यू के अनुसार फिल्म कुछ तकनीकी और गति से जुड़े सवाल भी उठाती है।
रामायण की कहानी और रावण का परिचय
फिल्म की कहानी केवल भगवान राम की जिंदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि रावण के अतीत और उसकी ताकत हासिल करने की यात्रा को भी दिखाया गया है। यश ने दशानन यानी रावण का किरदार निभाया है, जो तपस्या और महत्वाकांक्षा के दम पर तीनों लोकों पर अपना कब्जा जमाना चाहता है। उसे ब्रह्मा से वरदान मिलता है और वह लंका का राजा बनता है। दूसरी ओर, भगवान विष्णु राम के रूप में धरती पर अवतार लेते हैं।
फिल्म में अयोध्या के राजकुमार राम की परवरिश, उनके संस्कार, परिवार के प्रति प्रेम और धर्म की राह पर चलने की प्रतिज्ञा को दिखाया गया है। सीता स्वयंवर, राम-सीता विवाह, कैकेयी के वरदान और 14 साल का वनवास जैसे महत्वपूर्ण दृश्य शामिल हैं। वन में सीता हरण के बाद कहानी राम और रावण के बीच होने वाले युद्ध की तैयारी पर केंद्रित हो जाती है।
रणबीर कपूर का राम अवतार
रणबीर कपूर के लिए भगवान राम जैसे प्रतिष्ठित और पूजनीय किरदार को निभाना एक बड़ा चुनौती था। शुरुआत में वह संतुलित नजर आते हैं और धीरे-धीरे राम की मर्यादा, करुणा, धैर्य और सम्मान जैसी खूबियों में ढलते हैं। फिल्म में रणबीर का परशुराम का रूप भी दर्शकों को पसंद आ रहा है। वन के हिस्सों में उनका एक्शन भी खासा प्रभावशाली है।
यश का रावण और अन्य कलाकार
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यश का रावण है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, आवाज और संवाद अदायगी इस किरदार को अलग पहचान देती है। कई दर्शकों का मानना है कि यश का रावण रणबीर के राम से भी ज्यादा प्रभावशाली है। उन्होंने रावण को सिर्फ एक खलनायक नहीं बल्कि उसकी शक्ति और घमंड की भूख के साथ पेश किया है।
साई पल्लवी ने माता सीता के किरदार में सादगी और भावनात्मक गहराई दिखाई है। रवि दुबे ने लक्ष्मण के रूप में अच्छा प्रदर्शन किया है। अरुण गोविल का राजा दशरथ का रोल पुराने रामानंद सागर की रामायण देखने वालों के लिए खास अनुभव है। सनी देओल हनुमान के किरदार में नजर आ रहे हैं। इसके अलावा लारा दत्ता, काजल अग्रवाल, रकुल प्रीत सिंह, अनुपम खेर जैसे कई बड़े सितारे भी फिल्म में हैं, जो इसे व्यापक बनाते हैं।
सेट, वीएफएक्स और म्यूजिक
फिल्म का विजुअल स्केल सबसे बड़ा आकर्षण है। अयोध्या के महल, सोने की लंका, राजदरबार, रथ और युद्ध के दृश्य बड़े पर्दे पर एक भव्य दुनिया प्रस्तुत करते हैं। वीएफएक्स और CGI के इस्तेमाल से पौराणिक कथा को आधुनिक तकनीक के साथ प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है।
हंस जिमर और एआर रहमान का म्यूजिक फिल्म की भव्यता को और बढ़ाता है। बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों में थ्रिल और भावनाओं को उभारता है। हालांकि, कुछ जगहों पर विजुअल इफेक्ट्स में छोटी कमियां भी नजर आती हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया जा सकता है।
फिल्म की गति और समग्र प्रभाव
फिल्म की लंबी कहानी और कई किरदारों को स्थापित करने के कारण शुरुआत थोड़ी धीमी लग सकती है। कई पात्रों का परिचय और लगातार भव्य दृश्यों के बीच कहानी अपनी रफ्तार पकड़ने में समय लेती है। सेकेंड हाफ को ज्यादा मजबूत माना जा रहा है। रामायण की भावनाओं को बनाए रखते हुए इसे आधुनिक सिनेमाई अंदाज दिया गया है। वाल्मीकि और तुलसीदास की रामायण के संदर्भों के साथ भारतीय कला और संस्कृति की झलक भी मिलती है।
देखने लायक या नहीं?
‘रामायण: पार्ट 1’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय महाकाव्य को नए ढंग से पेश करने का प्रयास है। रणबीर कपूर का राम और यश का रावण इसे देखने लायक बनाते हैं। साई पल्लवी की मौजूदगी, शानदार एक्शन, म्यूजिक और बड़े दृश्य इसे थिएटर में देखने का अनुभव देते हैं। हालांकि, धीमी शुरुआत और कुछ जगहों पर अधिक भव्यता से कहानी का रस कम होता दिखता है।
रामायण से जुड़ी आस्था रखने वाले और बड़े पर्दे पर भव्य विजुअल अनुभव पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म खास हो सकती है। अब सभी की नजर इसके दूसरे पार्ट पर है, जिसमें राम और रावण की टक्कर को आगे बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार है।
स्रोत: livetimes.news





टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।