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प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद की रिपोर्ट में स्कूल मर्जर से पहले स्टूडेंट-टीचर शेयरिंग की सलाह

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने स्कूल मर्जर से पहले स्टूडेंट्स और टीचर्स की साझा क्षमता पर जोर दिया है।

प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद की रिपोर्ट में स्कूल मर्जर से पहले स्टूडेंट-टीचर शेयरिंग की सलाह

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने स्कूलों के विलय से पहले छात्रों और शिक्षकों की संख्या के आधार पर उनकी क्षमता साझा करने का सुझाव दिया है। परिषद की रिपोर्ट के अनुसार, स्कूलों का विलय अंतिम विकल्प होना चाहिए और इसके लिए कई आवश्यक शर्तें पूरी करनी होंगी। यह रिपोर्ट देश में स्कूलों को बंद करने और विलय से जुड़ी समस्याओं पर केंद्रित है।

स्कूलों के विलय से पहले 10 साल की योजना जरूरी

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रत्येक जिले में अगले 10 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्कूलों की योजना बनानी चाहिए। इसमें 5 से 9 वर्ष, 10 से 14 वर्ष, और 15 से 19 वर्ष के बच्चों की संख्या, जन्म दर, आबादी का विस्तार, नई बस्तियां, सड़कें और पलायन जैसे पहलुओं का समावेश किया जाना चाहिए। अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय निकायों की राय भी योजना बनाते समय जरूरी है।

स्कूल कॉम्प्लेक्स मॉडल के तहत संसाधनों की साझा व्यवस्था

रिपोर्ट में NEP 2020 के स्कूल कॉम्प्लेक्स मॉडल को लागू करने की सलाह दी गई है। इसके तहत आसपास के स्कूल एक-दूसरे के शिक्षकों, लाइब्रेरी, प्रयोगशालाओं और अन्य सुविधाओं को साझा कर सकते हैं। इससे स्कूलों का संचालन जारी रहते हुए संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। स्पेशल टीचर्स, काउंसलर, लाइब्रेरी और वर्कशॉप जैसी सुविधाएं भी एक से अधिक स्कूलों को दी जा सकती हैं। हालांकि, डिजिटल सुविधाएं टीचर्स की कमी को आंशिक रूप से पूरा कर सकती हैं, लेकिन कक्षा में शिक्षक की भूमिका पूरी नहीं कर सकतीं।

विलय से पहले शर्तें और निगरानी आवश्यक

रिपोर्ट के अनुसार, किसी स्कूल का विलय तभी किया जाना चाहिए जब नया स्कूल पर्याप्त कक्षाएं, शिक्षक, स्वच्छता, मिड-डे मील, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था सुनिश्चित कर ले। नए स्कूल और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पूरी होने तक पुराने स्कूल में पढ़ाई जारी रहनी चाहिए। विलय के प्रस्ताव पर अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय निकायों की राय लेना जरूरी है। इसके अलावा राज्य सरकार को जिला कार्यालय से अलग स्तर पर फैसले की समीक्षा करनी चाहिए।

स्कूलों के विलय के बाद कम से कम दो साल तक बच्चों की उपस्थिति, पढ़ाई, अगली कक्षा में प्रगति और सीखने के स्तर की निगरानी की जानी चाहिए। UDISE+ पोर्टल पर स्कूलों के पुराने और नए कोड का रिकॉर्ड रखा जाएगा ताकि यह पता चल सके कि स्कूल बंद हुआ है, मर्ज हुआ है या अपग्रेड किया गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि स्कूलों का विलय केवल नामांकन में गिरावट के आधार पर नहीं होना चाहिए, बल्कि वास्तविक जरूरतों और स्कूल तक पहुंच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

  • देश में पिछले 10 वर्षों में 93,000 से अधिक स्कूल बंद हुए हैं।
  • उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और ओडिशा में सबसे अधिक स्कूल बंद हुए।
  • स्कूलों को मर्ज करने से पहले संसाधनों और शिक्षकों की साझा व्यवस्था पर जोर।
  • विलय के बाद कम से कम दो वर्ष तक निगरानी जरूरी।
  • अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय निकायों की राय लेना अनिवार्य।

स्रोत: tv9hindi.com

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संपादकीय टीम · Bharat Vistaar

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