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इजरायल चुनाव में सस्पेंस, नेतन्याहू की सत्ता पर असर डाल सकती हैं अरब पार्टियां

इजरायल संसदीय चुनाव में कोई भी गठबंधन बहुमत नहीं पा सका, अरब पार्टियों की भूमिका सरकार गठन में अहम हो गई है।

इजरायल चुनाव में सस्पेंस, नेतन्याहू की सत्ता पर असर डाल सकती हैं अरब पार्टियां

इजरायल संसदीय चुनाव में बहुमत नहीं, सरकार गठन पर सस्पेंस

इजरायल में हाल ही हुए संसदीय चुनाव के नतीजों में किसी भी पार्टी या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। चुनाव के बाद सरकार बनाने की प्रक्रिया में अरब पार्टियों की भूमिका अहम हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता में वापसी फिलहाल मुश्किल नजर आ रही है, क्योंकि शुरुआती रुझानों में कोई गठबंधन स्पष्ट जीत दर्ज नहीं कर पाया है।

हमास हमले के बाद पहला चुनाव

7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले के बाद यह इजरायल का पहला चुनाव था। इस चुनाव में राष्ट्रीय सुरक्षा और हमास के खिलाफ सैन्य कार्रवाई मुख्य मुद्दे रहे। लीकुड पार्टी ने अपनी सख्त सुरक्षा नीतियों और सैन्य अभियानों को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश किया और मतदाताओं को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार देश की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठा रही है।

विपक्ष ने सुरक्षा चूक को चुनावी मुद्दा बनाया

विपक्षी नेता गादी आइजनकोट और उनकी यशार पार्टी ने 7 अक्टूबर के हमले को रोकने में सरकार की सुरक्षा व्यवस्था की असफलता पर सवाल उठाए। उन्होंने वादा किया कि सत्ता में आने पर वे हमले की जांच के लिए आयोग बनाएंगे, ताकि सुरक्षा में हुई चूक का पता लगाया जा सके और जिम्मेदारों को सजा दी जा सके।

हमास हमले में 1,200 मौतें और 251 बंधक

7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले में लगभग 1,200 लोगों की मौत हुई थी। साथ ही, 251 लोगों को बंधक बनाकर गाजा में ले जाया गया था। इस हमले के बाद इजरायल ने गाजा पट्टी में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया। तब से सुरक्षा और युद्ध से जुड़े फैसले देश की राजनीति के केंद्र में हैं।

गाजा का भविष्य और सेना सेवा पर चर्चा

चुनाव के दौरान गाजा के भविष्य को लेकर मतदाताओं में बहस हुई। इसके अलावा, कट्टरपंथी युवाओं को सेना में अनिवार्य सेवा में शामिल करने का मुद्दा भी चुनावी बहस का हिस्सा बना। राजनीतिक दलों के अलग-अलग रुख ने चुनाव को और अधिक जटिल बना दिया है।

अरब पार्टियों की भूमिका सरकार गठन में निर्णायक

चुनाव में किसी भी गठबंधन को बहुमत न मिलने के कारण सरकार बनाने के लिए अन्य दलों का समर्थन जरूरी हो गया है। इस मामले में अरब पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। अंतिम परिणाम के बाद ही यह साफ होगा कि बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता में बने रहेंगे या विपक्ष को सरकार बनाने का मौका मिलेगा।

स्रोत: hindi.asianetnews.com

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संपादकीय टीम · Bharat Vistaar

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