देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (UG) 2026 के पेपर लीक मामले ने परीक्षा प्रणाली और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। CBI की जांच में जयपुर के जमवारामगढ़ से जुड़े "पापा-चाचा-भतीजा सिंडिकेट" का नेटवर्क सामने आया है, जो राजस्थान से गुरुग्राम तक फैला हुआ था। इस खुलासे ने लाखों छात्रों के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है।
जमवारामगढ़ परिवार पर CBI की नजर
राजस्थान की राजधानी जयपुर के जमवारामगढ़ इलाके से CBI ने दिनेश, मांगीलाल और विकास नामक तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। दिनेश और मांगीलाल सगे भाई हैं, जबकि विकास मांगीलाल का बेटा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह परिवार लंबे समय से मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े पेपर लीक नेटवर्क का हिस्सा था और परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंचाने में सक्रिय था।
सूत्रों के अनुसार, दिनेश का बेटा ऋषि भी जांच के दायरे में है। एजेंसियां पता लगा रही हैं कि उसे पेपर किस तरह उपलब्ध कराया गया और वह इस नेटवर्क से कितना जुड़ा था।
डिजिटल सबूत और आर्थिक लेन-देन की जांच
CBI जांच में डिजिटल डिवाइस, कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच की जा रही है। एजेंसियों को शक है कि परिवार के अन्य सदस्य भी इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं या उन्हें जानकारी थी।
एक बड़ा खुलासा विकास को लेकर हुआ है, जिसने पिछले साल NEET परीक्षा में चयन पाया था। माना जा रहा है कि उसने मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े नेटवर्क का फायदा उठाया और बाद में इस संपर्क तंत्र के माध्यम से पेपर अन्य छात्रों तक पहुंचाए। विकास पहले सीकर की चर्चित CLC कोचिंग का छात्र रह चुका है।
सीकर का कोचिंग कनेक्शन
जांच एजेंसियां कोचिंग संस्थानों, छात्रों और संदिग्ध संपर्कों के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही हैं। सीकर को मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग हब के रूप में जाना जाता है, इसलिए इस कनेक्शन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजस्थान से गुरुग्राम तक पेपर लीक का नेटवर्क
जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क केवल राजस्थान तक सीमित नहीं था। जमवारामगढ़ निवासी मांगीलाल और दिनेश ने 26 और 27 अप्रैल को गुरुग्राम के एक डॉक्टर से करीब 30 लाख रुपये में NEET का पेपर खरीदा था। इसके बाद दिनेश ने इस पेपर को अपने बेटे को उपलब्ध कराया, जो सीकर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था।
29 अप्रैल को यही पेपर कई अन्य छात्रों और अभिभावकों तक भी पहुंचाया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि नेटवर्क बहुत संगठित था और परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र कई हाथों तक पहुंच चुका था।
बीते वर्षों की चयन प्रक्रिया में भी जांच
CBI को यह भी पता चला है कि दिनेश के परिवार के चार बच्चों का पिछले साल NEET में चयन हुआ था। इस जानकारी के बाद एजेंसियां पिछले वर्षों की चयन प्रक्रिया और संभावित नेटवर्क की जांच भी कर रही हैं।
CBI यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ये घटनाएं संयोग मात्र थीं या इनके पीछे संगठित तंत्र था। पुराने रिकॉर्ड, परीक्षा पैटर्न और संदिग्ध संपर्कों की जांच इस मामले का अहम हिस्सा बन गई है।
कई राज्यों में फैला गिरोह
जांच में महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान समेत कई राज्यों के नाम सामने आ रहे हैं। CBI की टीम अलग-अलग राज्यों में छापेमारी और पूछताछ कर रही है। एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित गिरोह था, जो परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक कर मोटी रकम वसूलता था। डिजिटल चैट, बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल्स की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं।
एजेंसियां उम्मीद कर रही हैं कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े नाम भी सामने आएंगे।
छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी
NEET परीक्षा रद्द होने के फैसले ने लाखों छात्रों और अभिभावकों को झकझोर दिया है। महीनों की मेहनत और मानसिक दबाव के बीच परीक्षार्थी बेहद निराश हैं। सोशल मीडिया पर भी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सुरक्षा को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है।
छात्रों का सवाल साफ है कि अगर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा भी सुरक्षित नहीं रह सकती, तो मेहनत और मेरिट का भरोसा किस आधार पर कायम रहेगा। अब पूरा देश CBI की अगली कार्रवाई पर नजरें गड़ाए बैठा है, क्योंकि यह मामला सिर्फ पेपर लीक का नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार का आईना बन चुका है।





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